किसानों के साथ प्रधानमंत्री ने की
'मन की बात'
कांग्रेस का झूठ और लैब का सच :
जो किसान हितैषी होने का दावा करते है , उनकी सरकारों नें मुआवजे को हटाकर आधा कर दिया !

2013 के कानून से रेलवे, नेशनल हाईवे और खदान जैसी 13 योजनाओं को बाहर रखा गया हमने इस कमी को ठीक किया: प्रधानमंत्री
LAB के तहत सभी योजनाओं के लिए अधिग्रहण में चार गुना मुआवजा, 20% विकसित भूमि का मालिकाना हक़ और परिवार के एक सदस्य को नौकरी
सबसे पहले सरकारी जमीन का उपयोग, उसके बाद बंजर भूमि का उपयोग और फिर अनिवार्य हो तब जाकर उपजाऊ जमीन को हाथ लगाया जाय: प्रधानमंत्री
कानून में जो सुधार हो रहे हैं, वो धन्ना सेठों के लिए नहीं, बल्कि किसान की भलाई के लिए निजी व्यवसाय पर 2013 के नियम ही लागु होंगे
किसान को कानूनी हक: हिंदुस्तान में कोई भी सरकार किसान के कानूनी हक़ को छीन नहीं सकती है वो किसी भी कोर्ट में दरवाजे खटखटा सकते हैं
सरकार ने सोचा है कि किसानों को डबल फायदा हो किसानो को जमीन का मुआवजा मिले और जमीन देने के बाद भी उसका लाभ मिलता रहे
सहमति के नाम पर भ्रमित किया जाता है सरकार के लिए सहमति की बात पहले भी नही थी, आज भी नहीं है निजी उपयोग के लिए ये प्रावधान आज भी है
इंडस्ट्रियल कॉरिडोर प्राइवेट पूंजीपति नहीं, बल्कि सरकार बनती है, ताकि आसपास के 100-200 गांवो के बच्चों को वहीं रोजगार मिल जाए
सुनिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मन की बात

पढ़िये 'मन की बात ' में प्रधानमंत्री द्वारा प्रस्तुत किये विचार